सुनने की मशीन (hearing aid) आज इतनी उन्नत हो गई है कि लगभग हर तरह की सुनने की कमज़ोरी में फायदेमंद है। लेकिन सही मशीन चुनना ज़रूरी है — और यह काम बिना जांच के नहीं हो सकता।
सुनने की मशीन किसे ज़रूरत होती है?
अगर आप या आपके परिवार में कोई:
- बार-बार बातें दोहराने को कहता है
- टीवी की आवाज़ बहुत तेज़ रखता है
- फोन पर सुनने में तकलीफ होती है
- शोर में बातचीत समझने में मुश्किल होती है
- बहुत थका हुआ महसूस करता है सुनने की कोशिश करते-करते
...तो सुनने की जांच ज़रूर कराएं। मशीन तभी लगाई जाती है जब ऑडियोमेट्री से यह साबित हो कि सुनने में कमज़ोरी है।
⚠ बिना जांच के मशीन न लें
बाज़ार में बिना जांच के मशीन बेचने वाले बहुत हैं। ऐसी मशीन न केवल बेकार होती है बल्कि बचे हुए सुनने की क्षमता को भी नुकसान पहुंचा सकती है। हमेशा MASLP/B.ASLP प्रमाणित ऑडियोलॉजिस्ट से ही मशीन लगवाएं।
सुनने की मशीन के प्रकार
BTE (Behind-the-Ear) — कान के पीछे लगने वाली
सबसे आम और भरोसेमंद प्रकार। मशीन कान के पीछे होती है और एक नली से कान में जाती है।
किसके लिए: हर उम्र के लिए, हर तरह की सुनने की कमज़ोरी के लिए। बच्चों के लिए सबसे उपयुक्त।
फायदे: टिकाऊ, आसानी से साफ होती है, शक्तिशाली।
RIC/RITE — पतली तार वाली BTE
BTE से छोटी और कम दिखने वाली। आवाज़ की गुणवत्ता बेहतर। कम और मध्यम सुनने की कमज़ोरी के लिए।
ITE (In-the-Ear) — कान में लगने वाली
पूरी तरह कान में फिट हो जाती है। बाहर से कम दिखती है।
किसके लिए: वयस्कों के लिए जिन्हें BTE संभालने में तकलीफ हो।
डिजिटल बनाम एनालॉग मशीन
एनालॉग: पुरानी तकनीक — सभी आवाज़ें समान रूप से बड़ी करती है। शोर में बहुत तकलीफ होती है।
डिजिटल: आधुनिक तकनीक — बोली और शोर को अलग करती है। Bluetooth से फोन और टीवी से जुड़ सकती है। बहुत बेहतर अनुभव।
MMM हियरिंग सेंटर में केवल डिजिटल मशीनें लगाई जाती हैं।
🔌 बिजनौर में उपलब्ध ब्रांड
MMM हियरिंग सेंटर में Signia, Phonak, Widex, GN ReSound की डिजिटल मशीनें डीलर कीमत पर उपलब्ध हैं। सभी मशीनें ऑडियोग्राम के अनुसार प्रोग्राम की जाती हैं।
मशीन फिटिंग की प्रक्रिया — MMM हियरिंग सेंटर में
- पूरी ऑडियोमेट्री जांच
- ऑडियोग्राम के अनुसार सही मशीन का चुनाव
- कान का माप लेना (ear impression)
- मशीन को आपकी सुनने की ज़रूरत के अनुसार प्रोग्राम करना
- मशीन कैसे पहनें, साफ करें और रखें — पूरी ट्रेनिंग
- 2–4 हफ्ते बाद फॉलो-अप — मशीन को और बेहतर बनाने के लिए
मशीन लगाने के बाद क्या होता है?
शुरुआत में कुछ हफ्ते लग सकते हैं आदत पड़ने में। दिमाग धीरे-धीरे नई आवाज़ों को समझना सीखता है। ज़्यादातर मरीज़ 4–8 हफ्ते में बड़ा फर्क महसूस करते हैं।
बिजनौर में सुनने की मशीन लगवाएं
Dr. Shehroz Majid सही मशीन चुनने में मदद करेंगे। डीलर कीमत पर सभी ब्रांड उपलब्ध।